बुधवार, 22 फ़रवरी 2017

बच्चे हैं कंपनी के CEO, हुनर जानकर रह जाएंगे हैरान

बचपन में हम अपने पैरेंट या रिलेटिव द्वारा दिए पैसे को जुटाकर खर्च निकालते हैं। जिस उम्र में हम पढ़ाई और खेलकूद करने में पूरा बचपन गुजारते हैं, यदि इस उम्र में यदि कोई कंपनी का मालिक हो तो आपके लिए आश्चर्य वाली बात होगी। जी हां, आज आपको बता रहा है कि भारत के कुछ होनहार छात्र; जिनकी उम्र लगभग 12 से 17 वर्ष की होगी, अपनी कंपनी के मालिक हैं। ये छोटे-छोटे बच्चे न सिर्फ स्कूल जाते हैं बल्कि साथ में अपनी कंपनियां भी चलाते हैं।
खेलकूद-पढ़ाई के अलावा कम उम्र में एक कंपनी का मालिक बनना जुनून और कुछ हटके सोचने पर निर्भर करता है। आइए जानते हैं कि आखिर कम उम्र में कहां से ऐसे आइडियाज आएं, जिससे अपनी कंपनी के सीईओ बन बैठे।




1. 12 साल के अवी ऐसे बने कंपनी के मालिक
गुड़गांव के रहने वाले 13 साल के अवी दयानी बताते हैं कि आज से एक साल पहले एक ऐसी घटना हुई, जिससे उनको अपनी कंपनी खोलने का आइडिया आया। उन्होंने बताया कि किसी काम के लिए मेरी मां विदेश यात्रा के लिए जाने की तैयारी कर रही थीं। उस वक्त घर में काम करने वाली नैनी आना बंद कर दिया, जिसकी वजह से पापा बहुत ही परेशान हुए और पूरा काम उन्होंने अकेले किया। इसको देखते हुए एक आइडिया सूझा कि क्यों न एक कॉल पर काम करने वाली 'नैनी' को बुलाया जा सके, जिसके लिए मैंने 'शैनी' (शॉर्ट सर्विस नैनी) नाम का ऐप तैयार किया।
अवी अभी 7वीं क्लास में पढ़ाई कर रहे हैं। उनके साथ 12 साल के नक्ष कोहली बिजनेस पार्टनर हैं, जोकि स्कूलमेट भी हैं। बातचीत के दौरान नक्ष ने बताया कि सबसे पहले आस-पड़ोस में सर्वे किया गया, जिसमें कई लोग प्रशिक्षित बेबीशीटर को सिर्फ 2 घंटे के काम के लिए 1000 रुपए तक देने को तैयार थे। इसके बाद हम लोगों ने बेबीशीटर से संपर्क करने के लिए कॉलेज स्टूडेंट्स और आस-पास मोहल्ले के वृद्ध महिलाओं की मदद मिली। 'शैनी' ऐप में बेबीशीटर की सभी जानकारियां दी गई। ऐप का मकसद यह था कि एकल परिवार, जहां पति-पति या मां-बाप दोनों ही काम पर जाते हों। 
अवी और नक्ष के इस अनोखे आइडिया को YEA! इंडिया ने इन्हें फर्स्ट प्राइज के रूप में 50,000 रूपए दिए। दोनों ने ही अपनी कंपनी पिछले साल मार्च महीने में रजिस्टर कराई थी।


 
2. ट्रैफिक कम करने के लिए बनाया अनोखा ऐप
17 साल के केविन ठक्कर ने 'मॉय वैले' ऐप तैयार किया, जिसके जरिए अवैध पार्किंग को रोका जा सकता है। यदि आप भीड़-भाड़ वाले इलाके हैं और पार्किंग की जगह नहीं मिल रही है तो ऐसे में आप वैले पार्किंग के जरिए सही और सुरक्षित पार्किंग कर सकेंगे। इस आइडिया के लिए YEA!इंडिया कॉन्टेस्ट में केविन रनर-अप रहे, जिसमें प्राइजमनी के रूप में 40 हजार रूपए मिले थे। 
केविन ने बताया कि लगभग 200 युवाओं से ऑनलाइन सर्वे कराया गया, जिसमें 80 प्रतिशत लोग वैले पार्किंग के लिए पेड करने को तैयार हैं।




3. जुड़वा बच्चों की सक्सेसफुल कहानी
राजस्थान स्थित उदयपुर के जुड़वा बच्चे पाल और चिन वर्धमान जब क्लास दो में पढ़ते थे, तभी से 'डिजिटल विजुअल इफेक्ट' में इंट्रेस्ट दिखाना शुरू कर दिया था। जुड़वा भाईयों की रूचि देखकर इनकी मां मंजु; जोकि खुद भी एक कलाकार हैं, ने भी उन्हें प्रोत्साहन देना शुरू कर दिया। 8 साल की उम्र में पाल को मुंबई के माया एकेडमी में एडवांस सिनेमैटिक कोर्स में दाखिला दिला दिया गया। इसके बाद उदयपुर से 10 साल की उम्र में पाल ने सागा से एडवांस सिनेमैटिक कोर्स करके मुंबई वापस चले गए और स्क्रीनप्ले कोर्स किया। वहीं भाई चिन ने 10 साल की उम्र में मुंबई के इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव एक्सीलेंस से शॉर्ट एक्टिंग कोर्स किया।
4 साल पहले दोनों ने एक साई-फाई (sci-fi) मूवी बनाने का निर्णय लिया, जोकि दो बच्चे और एक एलियन से जुड़ी कहानी थी। इस एनिमेटेड और ग्राफिक्स फिल्म का नाम 'द एडवेंचर ऑफ पालचिनगिरी बिगिन्स', जोकि दोनों भाईयों के नाम था। इस एनिमेटेड फिल्म को नेवादा फिल्म फेस्टिवल के स्टूडेंट कैटेगरी में प्लेटिनम रील अवार्ड से नवाजा गया। दोनों भाई अब 16 साल के हैं और अमेरिका से एडवांस वीएफएक्स की पढ़ाई करने का प्लान कर रहे हैं।




4. कम उम्र में बनाया एप्पल आईफोन के लिए शानदार ऐप
चेन्नई के श्रवण और संजय कुमारन स्टीव जॉब्स से बेहद ही प्रभावित हैं। बचपन में जब बच्चे इंजीनियर-डॉक्टर बनने की बात कहते हैं, उसी उम्र में दोनों भाईयों ने एप्पल ऐप स्टोर के लिए एक ऐप तैयार करने का निर्णय लिया। इनके पिता कुमारन खुद एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और दोनों बच्चों को कंप्यूटर प्रोग्रमिंग के बेसिक पढ़ाते रहे। 
साल 2011 के दौरान दोनों ने आईओएस वर्जन में  ऑफलाइन चोर-पुलिस गेम 'कैच मी कॉप' का पहला ऐप बनाया। दोनों ने दिसंबर 2011 में पार्टनरशिप फर्म के तहत ऐप को रजिस्टर्ड किया। जिसे एप्पल कंपनी ने पहले तो कुछ तकनीकी गड़बड़ियों के कारण रिजेक्ट कर दिया, लेकिन संशोधन के बाद एक सप्ताह के भीतर स्वीकार कर लिया। श्रवण बताते हैं कि मुझे आज भी याद है कि इस उपलब्धि के लिए डैड केक काट कर सेलिब्रेट किया था। 
इसके बाद दोनों ने 7 आईओएस ऐप डेवलप कर चुके हैं, जोकि न सिर्फ गेमिंग बल्कि प्रेयर, हेल्पलाइन इमरजेंसी नंबर बनाए। इतना ही नहीं, 3 अन्य एंड्राएड ऐप भी बनाए हैं।




5. तीनों छात्रों ने बनाया अनोखा 'जूस'
हैदराबाद में 9वीं के छात्र राघव (14), 10वीं के अरमान (15) और 11वीं की छात्रा प्रणवी वेगेस्ना (16) ने TiE यंग अंत्रप्रेन्योर इवेंट में फर्स्ट प्राइस सिर्फ एक छोटे से आइडिया से जीत लिया। तीनों स्टूडेंट्स ने 'जूसर' नाम का प्रोडक्ट तैयार किया था। राघव ने बताया कि यह जूसर एक मिक्स फ्रूट पाउडर है। जिसमें 95 फीसदी सिर्फ भिन्न-भिन्न फलों से तैयार किया गया है, जिसे 6 महीने तक स्टोर किया जा सकता है। 
वहीं प्रणवी के मुताबिक यह फ्रूट मिक्स पाउडर डायबिटिक और मोटापे से परेशान व्यक्तियों के लिए बेहद फायदेमंद है। राघव की मां योगेश्वरी पेरूमल; जोकि एक BITS पिलानी में फार्मेसी की प्रोफसर हैं, ने फार्मूला बनाने में बेहद मदद की। 



6. क्रिएटिव आइडिया ने बनाया फेमस
दिल्ली के 17 वर्षीय स्टूडेंट जयांश भारतीया ने कम उम्र में एक ऐसी फिल्म बनाई जिसकी काफी तारीफ हुई। 'स्लेट' नाम की यह फिल्म स्कूल जाने वाली एक छोटी बच्ची के ऊपर बनाई गई है, जिसे स्कूल के एक बच्चे ने गिफ्ट में स्लेट देता है जोकि स्कूल जाने में असमर्थ है। डॉक्यूमेंट्री के दौरान जयांश के जीवन में परिवर्तन कर देने वाला एक मोड़ भी आया। पेड़ों और हरियाली से जुड़ी डॉक्यूमेंट्री सीरीज 'स्पीकिंग ट्री' बनाने के दौरान वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) संस्थान बेहद प्रभावित हुए, जिसे उन डॉक्यूमेंट्री को ट्री कैंपेन के प्रमोशन के लिए स्वीकार कर लिया गया।









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